धनंजय हलदार
राजमहल प्रखंड क्षेत्र के दरला पंचायत अंतर्गत सरायपूरा विद्यालय पर एकल शिक्षक के रूप में कार्यरत पूर्णेन्दु हांसदा एक किसान परिवार से निकलकर कैसे शिक्षक तक पहुंचे. राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिला, प्रखंड बहरागोड़ा, थाना बरसोल, गांव पाथरा निवासी गोरा चंद हांसदा के घर 1972 में पूर्णेन्दु हांसदा का जन्म हुआ. पिताजी खड़कपुर स्टेशन में आरपीएफ का नौकरी करता था. और माता गृहस्थी का काम करती थी. तीन भाई बहन थे और सबसे छोटे थे. पूर्णेन्दु हांसदा की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय पाथरा 1978 मैं हुआ. एवं 1983 में घर से 3 किलोमीटर दूर राज्य संपोषित उच्च विद्यालय गंडानाटा में वर्ग 6 में नामांकन दाखिला किया. घर से विद्यालय पैदल ही आना-जाना करते थे. एवं वर्ग 1 से लेकर 9 तक बिना ट्यूशन के ही पढ़ाई किया. मैट्रिक में गणित विषय में थोड़ा सा कमजोर होने के कारण उन्हें गणित विषय का ट्यूशन लेना पड़ा. और अच्छे नंबर से मैट्रिक एग्जाम पास किया. इसके बाद घर से लगभग 40 किलोमीटर दूर घाटशिला महाविद्यालय से आर्ट्स विषय में इंटर पास किया एवं राजनीतिक विज्ञान में उन्होंने बीए पास किया. महाविद्यालय जाने के लिए उन्हें लगभग 12 किलोमीटर घर से साइकिल चलाकर चाकूलिया स्टेशन तक पहुंचाना पड़ता था. उसके बाद वह ट्रेन के माध्यम से घाटशिला पहुंचते थे. इसके बाद घर में परेशानी आई पापा पैसा देना बंद किया. और अपने ही मेहनत पर परिवार को चलना पड़ा था जिसके वजह से उन्होंने पढ़ाई को बंद कर दिया. बचपन से ही पापा आरपीएफ में होने के कारण उन्हें फौजी में जाने का काफी शौक था. जिसके लिए उन्होंने कई बार ट्राई भी किया परंतु नहीं हो पाया. इसके बाद उनके मन में शिक्षक की नौकरी के लिए आगे की पढ़ाई काम करते हुए शुरू किया उन्होंने पीजी कोऑपरेटिव कॉलेज जमशेदपुर से किया. एवं उसके बाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय चैनपुर पश्चिम सिंहभूम से किया. अपने जीवन में लगभग 15 से 20 अब तक टोटल फॉर्म भर चुके थे और सभी में निराशा हाथ लगे. अपनी अंतिम फॉर्म समझकर शिक्षक का फॉर्म भरा. और सफलता हाथ लगी 11 मार्च 2015 को राजमहल प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय हाथीगड़ योगदान दिया. इसके बाद 5 जनवरी 2018 को दरला विद्यालय में स्थानांतरित किया गया. एवं 20 फरवरी 2025 को एकल शिक्षक के रूप में प्राथमिक विद्यालय सरायपूरा में स्थानांतरित किया गया है.

