साहिबगंज बना करोड़ों साल पुराने जीवाश्मों का खजाना,कोलकाता से पहुंचे शोधार्थियों ने किया अध्ययन।

aaryawart duniya
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 जीवाश्मों का खजाना,कोलकाता


साहिबगंज
:पूरे संथाल परगना क्षेत्र में साहिबगंज जिला इन दिनों करोड़ों वर्ष पुराने जीवाश्म (फॉसिल्स) के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। जिले के विभिन्न इलाकों में प्राचीन जीवाश्मों की लगातार मिल रही मौजूदगी ने न सिर्फ वैज्ञानिकों बल्कि देशभर के शोधार्थियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के कोल काता स्थित सरोजिनी नायडू विश्वविद्यालय के 30 से अधिक जियोलॉजी के छात्र-छात्राएं अध्ययन और शोध के उद्देश्य से साहिबगंज पहुंचे। भूवैज्ञानिक पदाधिकारी सह मॉडल कॉलेज राजमहल के प्राचार्य डॉ.रंजीत सिंह के मार्ग दर्शन में यह टीम तालझारी प्रखंड के वृंदावन क्षेत्र में पहुंची,जहां जीवाश्मों की प्रचुर ता देखी जा रही है।वृंदावन पहुंचकर छात्र- छात्राओं ने विभिन्न प्रकार के खंडित जीवाश्मों का बारीकी से निरीक्षण किया।

उन्होंने स्थल पर ही प्रारंभिक जांच कर जीवाश्मों की संरचना,बनावट और संभावित आयु का अध्ययन किया।इसके साथ ही वैज्ञानिक परी क्षण (लैब टेस्ट) के लिए कई महत्वपूर्ण नमूने एकत्रित कर अपने साथ ले गए,जिससे भविष्य में और विस्तृत शोध संभव हो सकेगा।

इस अध्ययन दौरे के दौरान कोलकाता से आए डॉ.तौहीन राय सहित अन्य शोधार्थी और छात्र- छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने क्षेत्र में पाए जा रहे जीवाश्मों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह इलाका भूवैज्ञानिक दृष्टि से काफी समृद्ध है।स्थानीय स्तर पर भी इस खोज को लेकर उत्साह का माहौल है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन जीवाश्मों का संरक्षण और व्यवस्थित वैज्ञानिक अध्ययन किया जाए, तो साहिबगंज न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के प्रमुख भूवैज्ञानिक और शैक्षणिक केंद्रों में अपनी पहचान बना सकता है।साथ ही, यह क्षेत्र भविष्य में भू-पर्यटन (Geotourism) के रूप में भी विकसित हो सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।

भूवैज्ञानिक पदाधिकारी डॉ. रंजीत सिंह ने कहा की साहिबगंज क्षेत्र भूवैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध है।यहां करोड़ों वर्ष पुराने जीवा श्म मिल रहे हैं,जो पृथ्वी के प्राचीन इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि इस दिशा में व्यवस्थित और गहन शोध किया जाए,तो यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकता है।

कोलकाता से साहिबगंज पहुंचे डॉ. तौहीन राय ने कहा की वृंदावन क्षेत्र में मिले जीवाश्म बेहद महत्वपूर्ण हैं।यहां की संरचना और विविधता यह दर्शाती है कि यह क्षेत्र वैज्ञानिक अध्ययन के लिए काफी उपयोगी है। हम लोग यहां से सैंपल लेकर जा रहे हैं,जिनकी लैब जांच के बाद कई नई जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।

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