मंडरो फॉसिल पार्क में शोध गतिविधियों को सुदृढ़ करने हेतु रिसर्च हॉस्टल स्वीकृत

aaryawart duniya
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वैज्ञानिक शोध फॉसिल पार्क



साहिबगंज वन प्रमंडल अंतर्गत मंडरो स्थित फॉसिल पार्क में संरक्षित जीवाश्मों के अध्ययन और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रिसर्च हॉस्टल निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल फील्ड-आधारित अध्ययन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक आवश्यक कदम मानी जा रही है। मंडरो फॉसिल पार्क क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवाश्म अवशेष भू-विज्ञान एवं पुराजीव विज्ञान के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। इनका व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए शोधार्थियों को स्थल पर ही पर्याप्त समय और सुविधा उपलब्ध होना आवश्यक है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अवसंरचना विकसित की जा रही है। इसके साथ ही एक कॉन्फ्रेंस रूम का निर्माण भी प्रस्तावित है, जहां शोध निष्कर्षों की प्रस्तुति, अकादमिक चर्चा एवं छोटे स्तर के प्रशिक्षण/वर्कशॉप आयोजित किए जा सकेंगे। यह सुविधा शोध कार्य को केवल फील्ड तक सीमित न रखकर उसे संवाद और ज्ञान-साझाकरण से जोड़ने में सहायक होगी।



हाल के समय में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं यहां शोध कार्य हेतु पहुंच रहे हैं। पटना विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने यहां फील्ड रिसर्च किया, वहीं कोलकाता के सरोजिनी नायडू महिला महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी जीवाश्म अध्ययन के लिए स्थल का भ्रमण किया। यह दोनों भ्रमण साहिबगंज के भू-वैज्ञानिक डॉ रणजीत सिंह के नेतृत्व में हुए। इनके अलावा रांची से भारतीय भू-विज्ञान सर्वेक्षण संस्थान से भी एक टीम ने डॉ सौरव पाल के नेतृत्व में फॉसिल पार्क एवं बोरियो स्थित पहाड़ियों में जीवाश्म अध्ययन किया। वर्तमान में शोधार्थियों का यहां नियमित रूप से आगमन हो रहा है, जिससे यह क्षेत्र एक उभरते हुए रिसर्च केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। एवं वन विभाग के अनुसार इस पहल से मंडरो फॉसिल पार्क एवं साहिबगंज के पहाड़ी, वन क्षेत्र में उपलब्ध जीवाश्मों के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, अध्ययन और अकादमिक उपयोग को बढ़ावा मिलेगा तथा यह स्थल शोध एवं शिक्षण के लिए अधिक सक्षम बन सकेगा।

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